क्या हम चीन से डर गए?

बिल्कुल नहीं!

क्या चीन हमको चिंता में डाल सकता है?

हाँ!

क्या हम चीन को हरा सकते हैं?

100% युद्ध के मोर्चे पर, 75% कूट नीति के मोर्चे पर. सिर्फ कुछ अन्तरदेशीय दुश्मनों का सर कुचला जाना चाहिए, बाकी सेना सब सम्भाल लेगी.

शी जिनपिंग की देखरेख में PLA की जो ये मार्चिंग परेड देखते हैं ना… जिसमें बख्तर बंद वाहनों, मिसाइलों की आसमानी लकीरों, टिड्डी दल के माफिक हेलिकाप्टरों के मायावी मकड़जाल और जमीन पर कदम ताल करते हजारों PLA सैनिकों का हुजूम दिखाया जाता है, ये एक अजेय सेना का तिलिस्म गढ़ने का प्रयास मात्र है.

यहाँ आपको हथियारों और साजो सामान की प्रदर्शनी ज्यादा दिखाई देंगी, उन पर निर्भरता ज्यादा दिखाई देंगी.ये जो जमीनी, आसमानी और जलीय औजारों का जखीरा है ना ये PLA की कमजोरी (weakness) और भंगुरता (fragilities) को छुपाने मात्र का प्रयास है.

PLA के नव नवोदित अग्रिम पंक्ति वाले सैनिकों को ये सब दिखाकर उनको जीवित और अविजित होने की उम्मीद दिखाई जाती है.ऐसे insulated और protected माहौल में कोई भी लंबी उम्र की गलत फहमी पाल लेता है. क्योंकि वन-चाइल्ड पॉलिसी वाले देश में माँ बापों ने अपने इकलौते बच्चों को कितना pamper किया होगा, आप समझ ही सकते हैं. फिर उन्होंने अपने जीवन काल में कोई असली की लड़ाई भी देखी नहीं है.

कुछ कम पुराने इतिहास को देखें तो 1979 में अमेरिका ने इनको नॉर्थ और साउथ कोरिया में धोया, वियतनाम जैसे छोटे से मुल्क ने गुरिल्ला वारफेयर में इनके 62500 PLA सैनिकों को मार गिराया, और तकरीबन 500 से ऊपर सैन्य वाहन और 115 से ऊपर artillery equipments को ध्वस्त कर दिया था.

1970 के बाद से ही, (क्योंकि PLA चीन की राष्ट्रीय सेना नहीं है, ये चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की वफादार और उसी के प्रति जवाबदेह लोगों का संगठन है) चीनी सरकार ने इनको व्यस्त रखने के लिए इन्हें व्यापार करने की छूट दे दी तो इन्होंने रियल एस्टेट से लेकर बैंकिंग, माइनिंग से लेकर फूड प्रोसेसिंग, मेडिसन से लेकर टेक्नोलॉजी (Huawei इन्हीं का प्रोडक्ट है) हर क्षेत्रः में अपनी लाभकारी पैठ बना ली. पूरी PLA भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी बैठी है.

इनकी जीवन शैली एक दम उच्च-स्तरीय ऐशो आराम वाली है जिसमें बड़े बड़े बिजनेस एम्पायेर हैं और swanky लाइफस्टाइल है.चीन की PLA और पाकिस्तान की सेना की जीवन शैली में इतनी similarities (समानताएं) हैं कि दोनों का एक दूसरे से लगाव होना एक आसान सी प्राकृतिक घटना है क्योंकि दोनों की बुनियाद में भ्रष्टाचार की ईंट, ऐशो आराम की रेत और नैतिक अवमूल्यन की सीमेंट है.

जब से शी जिनपिंग (2012) ने सत्ता संभाली है, उसने 100 से ज्यादा तो जनरल, (कर्नल, मेजर इत्यादि की तो संख्या कोई बता ही नहीं सकता) बर्खास्त किए हैं. कई जनरल तो सेकंड ईन कमांड रैंक वाले थे जिन पर रिश्वत लेकर सैन्य भर्तियां और पदोन्नतियॉ करने का आरोप है.पूरी कमांड ही बदलनी पड़ी शी जिनपिंग को.

भ्रष्टाचार, घमंड और अहंकार चीनी PLA सेना की खासियत है, और लड़ने का इनमें ना तो माद्दा है और ना ही ज़ज्बा और अनुभव तो है ही नहीं. Doklam संकट के दौरान पूरी दुनिया ने इनकी औकात देखी और अब गलवान घाटी से ये इतनी बुरी तरह पिट कर गए हैं कि केवल 5th Generation Warfare ही चला पा रहे हैं बीजिंग से.

इनके जितने भी एयर फोर्स स्टेशन हैं तिब्बत में या चीन में (ल्हासा, गोन्गर, Ngari-Gunsa, Xigaze) सब के सब भारतीय वायु सेना के निशाने पर हैं. भारत के 51 फाइटर प्लेन (जगुआर IS और मिराज 2000H) India के 3 squadron, nuclear capability के साथ पलक झपकते ही शिकार की ओर उड़ने को तैयार बैठे हैं. भारत के सुखोई SU-30MKI फाइटर प्लेन की चौथी पीढ़ी का सबसे खतरनाक एयरक्राफ्ट है जिसका तोड़ चीन के पास नहीं है.

चीन और उसकी अनावश्यक रूप से घमंडी PLA को अपनी औकात मालूम है, उसे ये भी मालूम है कि ये 1962 का भारत नहीं है.इसीलिए फिर से लिख रहा हूँ, ये PLA की तथाकथित सेना यही छोटे मोटे टुच्चा गिरी वाले काम करते रहेंगे, money-minded (capitalists) लोगों में असली पंगा लेने का दुस्साहस नहीं होता…

इनमें और पाकिस्तान की फौज में भरे पड़े जाहिलों में कोई फर्क़ नहीं है. दोनों ही असली युद्ध से घबराते हैं…